Tuesday, March 30, 2021

स्वयं पर विश्वास करो

 एक नगर में एक ब्राम्हण पंडित रहता था।  उसे एक सेठ में दक्षिणा में एक बकरा दिया था।  पंडित बकरे को पाकर बहुत खुश था और उसे लेकर अपने घर की ओर चल दिया।  रास्ते में तीन ठगो ने ब्राम्हण को बकरे के साथ आते देखा।  उनलोगो ने आपस में विचार किया क्योना इस पंडित से इसके बकरे को किसी तरह ले लिया जाये और फिर हमलोग आज खाने में इस बकरे का स्वाद लेंगे। तभी उन तीनो ठगो में से एक ने एक षड्यंत्र रचा।  उनमे से एक ने वेष बदल कर पंडित के समीप गया और बोला "अरे पंडितजी आप इस कुत्ते को लेकर कहा जा रहे है।"


"अरे मुर्ख अँधा है क्या दिखायी नहीं देता ये कुत्ता नहीं बकरा है " पंडित ने बोलै। 

और ये कहकर पंडित आगे बढ़ गए । 

कुछ दूर जाते ही दूसरा ठग पंडित के सामने आया और बोला , "अरे पंडित जी आप इस बछड़े को लेकर कहा जा रहे है "

यह सुनकर पंडित जो को और क्रोध आ गया और गुस्से में बोला "अँधा है क्या दिखाई नहीं देता ये बकरा है कोई बछड़ा नहीं "

और यह कहकर पंडित जी आगे बढ़ गए। 

कुछ और दूर जाते ही तीसरे ठग से उनका सामना गए और तीसरे ठग ने बोलै 

"अरे पंडित जी आप इस गधे को लेकर कहा  जा रहे है "

इस बार पंडित की चिंता बार गयी और वो सोचने लगे 

"बार बार लोग आकर इसे कभी कुत्ता तो कभी बछड़ा तो कभी गधा क्यों बोल रहे है "

उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।  कुछ अपसगुन होने के डर से वो पंडित भयभीत होकर उस बकरे को वही रस्ते में चोर कर भाग गया। 

फिर उन ठगो ने उस बकरे को पकड़ उसका भोजन में आनंद लिया। 



इसीलिए कहा गया है स्वयं पर विस्वास करो और हमेशा दूरसे के बातो में विस्वास न कर लिया करो. 

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