Sunday, December 20, 2020

दो गिद्धों की कहानी




एक समय की बात है ,जब एक राजा को उपहार में दो गिद्ध मिले। राजा उन दोनों गिद्धों को देख बहुत ख़ुश  हुआ और अपने मंत्रियो को आज्ञा दी की उनदोनो गिद्धों को एक कुशल प्रशिक्षक के द्वारा आसमान में ऊँचा से ऊँचा उरने में प्रशिक्षण दिया जाय। मंत्रियो ने भी राजा के आदेशानुसार उस राज्य के सबसे मशहूर प्रशिक्षक को नियुक्त किया जो हर चिड़ियों के रग रग से परिचित था। वह दोनों गिद्धों को उरने के कला सीखना आरम्भ किया।  एक गिद्ध ने अपने शिक्षक की हर बात सुन बहुत बेहतरीन करने लगा वो आसमान में ऊँचा उरने लगा और पुरे आसमान में भ्रमण करने लगा , वही दूसरी ओर दूसरा गिद्ध जिस पेड़ पर बैठा था वह से टस से मस नहीं हुआ। राजा तक ये खबर पहुंची। राजा ने अपने मंत्रियो को बुला मंत्रणा की और निर्णय लिया की शायद उन्हें और अच्छे  प्रशिक्षक की आव्शयकता  है जो गिद्धों को और अच्छे  से जनता हो अतः राजा से अपने मंत्रियो को आज्ञा दी की वो और अच्छे  प्रशिक्षक की तलाश करे।  मंत्रीयो ने राज्य को कोना कोना छाना मगर उन्हें पहले से अच्छा प्रशिक्षक न मिला।  जब वे लोग इसी तलाश में एक गाँव से गुजर रहे थे तो एक बूढ़े आदमी ने उनलोगो को चिंतित देख उनकी चिंता का कारण जानना चाहा।  मंत्रियो ने भी विस्तार से पूरी घटना सुनाई।  पूरी बात सुन वो बुरा व्यक्ति बोला  को वो उनकी समस्या का समाधान कर सकता है वो दूसरे गिद्ध को भी उरना सीखा सकता है अगर उसे इस कार्य के लिए नियुक्त किया जाय।  मंत्रियो ने ऐसा ही किया।  फिर अगले सुबह जब राजा अपने उपवन में विहार को निकले तोह देख कर अचमभित रह गए की दोनों गिद्दा आसमन की नई उचाईयो को छू रहे है और पुरे आसमान में भ्रमण कर रहे है ।  राजा ने उस बूढ़े  आदमी से पूछा की उसने ऐसा क्या किया जिससे जो गिद्ध कल तक अपने पेड़ की शाखा से नहीं हट रहा था आज इतना ऊंचा उरने लगा।  उस बूढ़े आदमी ने कहा "महाराज मैंने कुछ नहीं किया बस वो गिद्ध जिस पेड़ की डाली में बैठा था उसे डाली को काट दिया " 



सीख :

जीवन में भी हम सब अपने अपने डाल में सुरक्षित बैठे रहते है और न सिखने की इच्छा  से कभी प्रगति नहीं कर पाते। इसीलिए हमें जो चीज़ सिखने से रोकती है वो हमारा जड़तव ही है जिससे बहार निकलना है।  



Picture source: dreamstime.com

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